जयपुर, 18 अक्टूबर। राजस्थान में जीएसटी चोरी, बिना बिल खरीद-बिक्री और अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए कर देयता कम करने वालों के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग ने बड़ा प्रवर्तन अभियान चलाया है। विभागीय टीमों ने 12 और 13 अक्टूबर को प्रदेश के विभिन्न जिलों में 10 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सर्वे एवं जांच की कार्रवाई की। शुरुआती जांच में करीब 2.85 करोड़ रुपये की संभावित कर अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग के अनुसार, कार्रवाई के दौरान करदाताओं ने लगभग 2.51 करोड़ रुपये स्वेच्छा से जमा किए या आईटीसी रिवर्स किया है।
जयपुर के झोटवाड़ा स्थित मैसर्स स्टर्बन रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के यहां रिसॉर्ट निर्माण से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट की पात्रता की जांच की गई। इस दौरान कंपनी ने 55.26 लाख रुपये का आईटीसी रिवर्स किया।
वहीं, जयपुर के सी-स्कीम स्थित मैसर्स एजीआरएस वेंचर्स एलएलपी के मामले में अचल संपत्ति निर्माण से संबंधित करीब एक करोड़ रुपये के अपात्र आईटीसी का मामला सामने आया। विभाग के अनुसार, जांच के दौरान 99.76 लाख रुपये का आईटीसी रिवर्स किया गया।
अजमेर जिले के केकड़ी स्थित मैसर्स मारुति स्टील इंडस्ट्रीज के यहां स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। विभाग ने कारोबारी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा वाली पेन ड्राइव जांच के लिए अपने कब्जे में ली। मामले में करीब 15 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितता का आकलन किया गया, जबकि कारोबारी ने 10 लाख रुपये एसजीएसटी कैश लेजर में जमा कराए।
अजमेर के पुष्कर रोड स्थित मैसर्स असम टिम्बर एंड प्लाईवुड के यहां बिना उचित कर चालान माल की बिक्री और कारोबार छिपाने की आशंका पर जांच की गई। प्रारंभिक आकलन में करीब 8 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितता सामने आई।
कैसरगंज स्थित मैसर्स के.सी. एजेंसीज के मामले में कम्पोजिशन योजना के नियमों के उल्लंघन, बिना बिल ऑफ सप्लाई बिक्री और वास्तविक टर्नओवर छिपाने की आशंका सामने आई। विभाग ने 15 से 20 लाख रुपये की संभावित कर देयता का आकलन किया है। इसके विरुद्ध कारोबारी ने 15 लाख रुपये का चेक स्वेच्छा से प्रस्तुत किया।
ब्यावर स्थित मैसर्स अशोक टिम्बर ट्रेडर्स के यहां भी बिना बिल माल बिक्री की सूचना पर कार्रवाई की गई। विभाग ने 15 प्रदर्शों के रूप में कारोबारी अभिलेख जब्त किए। मामले में 10 से 15 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितता सामने आई, जबकि कारोबारी ने 6 लाख रुपये जमा कराए।
डीडवाना-कुचामन जिले में मैसर्स माहेश्वरी प्लाईवुड एंड हार्डवेयर के यहां बिना उचित बिल खरीद-बिक्री और आईटीसी के जरिए कर देयता समायोजित करने संबंधी सूचनाओं के आधार पर जांच की गई। प्रारंभिक तौर पर 7 से 8 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितता सामने आई। कारोबारी ने 7 लाख रुपये कैश लेजर में जमा कराए। मौके से मिले संदिग्ध दस्तावेजों की आगे जांच की जा रही है।
जयपुर के वैशाली नगर स्थित मैसर्स हेयर विग हाउस प्राइवेट लिमिटेड के यहां जांच में सितंबर 2025 से वस्तुओं के गलत कर वर्गीकरण के जरिए कम जीएसटी जमा कराने संबंधी अनियमितता सामने आई। विभाग ने 15 से 20 लाख रुपये की संभावित कर देयता का आकलन किया। जांच के दौरान कारोबारी ने 13.49 लाख रुपये जमा कराए।
खैरथल-तिजारा जिले के रीको औद्योगिक क्षेत्र स्थित मैसर्स वान्स एल्युमिनियम डिजाइन एलएलपी के मामले में विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर कार्रवाई की गई।
विभाग के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 15.74 लाख रुपये और वित्त वर्ष 2026-27 में 38.15 लाख रुपये सहित कुल 53.89 लाख रुपये की कर देयता का अंतर विवरणियों में सामने आया। कार्रवाई के दौरान कारोबारी ने 22.21 लाख रुपये स्वेच्छा से जमा कराए। शेष संभावित देयता की जांच जारी है।
फलोदी जिले के बाप स्थित मैसर्स एस.के. क्रेन सर्विस के यहां जीएसटीआर-2बी और जीएसटीआर-3बी में अंतर तथा अपात्र आईटीसी के इस्तेमाल का मामला सामने आया। विभाग के अनुसार, करीब 15.74 लाख रुपये के आईटीसी के समर्थन में कारोबारी समुचित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं पर आईटीसी लेने और करीब 25 लाख रुपये मूल्य के डीजी सेट की बिक्री को नियमित बिक्री विवरण में प्रदर्शित नहीं करने की जानकारी भी सामने आई। विभाग ने बताया कि कारोबारी ने 15.74 लाख रुपये जमा कराए हैं।
वाणिज्यिक कर विभाग के अनुसार, जीएसटी विवरणियों में अंतर, बिना बिल माल की खरीद-बिक्री, वास्तविक कारोबार छिपाने और अपात्र आईटीसी के मामलों की गहन जांच की जा रही है। कार्रवाई के दौरान जब्त दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, स्टॉक विवरण और करदाताओं के रिकॉर्ड का मिलान करने के बाद वास्तविक कर देयता निर्धारित की जाएगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जहां आवश्यक होगा, वहां जीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजस्व की सुरक्षा, कर व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदार कारोबारियों के लिए समान प्रतिस्पर्धात्मक माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
नोट: सभी मामलों में बताई गई अनियमितताएं प्रारंभिक जांच एवं विभागीय आकलन पर आधारित हैं। अंतिम कर देयता दस्तावेजों की जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद निर्धारित होगी।
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