योजना में नए ट्यूबवेल बनाने, पुराने जल स्रोतों को गहरा करने, पाइपलाइन बदलने और पंप-मोटर व इलेक्ट्रिकल पैनल दुरुस्त करने जैसे कार्य शामिल हैं। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रस्तावित कार्य गर्मी शुरू होने से पहले कितने पूरे हो पाएंगे और आम लोगों को पानी की किल्लत से कितनी राहत मिलेगी।
जलदाय विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जयपुर के विभिन्न शहरी सर्किलों में पानी की मांग और आपूर्ति की स्थिति चिंताजनक है।
साउथ सर्किल: रोजाना 367.50 एमएलडी मांग के मुकाबले 315.62 एमएलडी आपूर्ति, यानी 51.88 एमएलडी की कमी।
नॉर्थ सर्किल: 354.45 एमएलडी मांग के मुकाबले 261.85 एमएलडी आपूर्ति, यानी 92.60 एमएलडी की कमी।
जिला सर्किल के शहरी क्षेत्र: 47.20 एमएलडी मांग के मुकाबले केवल 22.57 एमएलडी आपूर्ति।
इन आंकड़ों के मुताबिक, नॉर्थ सर्किल में पानी की कमी सबसे अधिक है। शहर के कई इलाकों में कम प्रेशर और नियमित अंतराल पर पानी नहीं मिलने की समस्या भी सामने आ रही है।
पानी की समस्या केवल उपलब्धता तक सीमित नहीं है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर के कुछ शहरी इलाकों में पानी की सप्लाई का अंतराल करीब 24 घंटे है, जबकि जिला सर्किल के कई शहरी क्षेत्रों में 24 से 120 घंटे के अंतराल पर पानी पहुंच रहा है।
कम प्रेशर, पुरानी और दूषित पाइपलाइनें, खराब ट्यूबवेल, पंप-मोटर की दिक्कतें और नेटवर्क के अंतिम छोर पर बसे इलाकों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचना प्रमुख समस्याएं हैं। ऐसे में केवल पानी की उपलब्धता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि मौजूदा जल वितरण व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
समर कंटीजेंसी प्लान 2027 के तहत पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए कई कार्य प्रस्तावित किए गए हैं।
210 नए ट्यूबवेल बनाने का प्रस्ताव।
126 ट्यूबवेल या खुले कुओं को गहरा करने की योजना।
88.52 किलोमीटर एचडीपीई पाइपलाइन बदलने का प्रस्ताव।
7.72 किलोमीटर डीआई पाइपलाइन बदलने की योजना।
651 पंप-मोटर और 533 इलेक्ट्रिकल पैनल बदलने का प्रस्ताव।
पुरानी जीआई पाइपलाइन, सबमर्सिबल केबल और स्लूइस वाल्व बदलने के कार्य।
जरूरत बढ़ने पर टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान।
इन कार्यों का उद्देश्य नए जल स्रोत विकसित करने के साथ-साथ मौजूदा पाइपलाइन और पंपिंग व्यवस्था को दुरुस्त करना है, ताकि गर्मियों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो।
पेयजल संकट की चुनौती केवल जयपुर शहर तक सीमित नहीं है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 28.99 लाख आबादी के लिए प्रतिदिन 176.04 एमएलडी पानी की मांग है, जबकि आपूर्ति 118.07 एमएलडी दर्ज की गई है। इस तरह ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रतिदिन 57.97 एमएलडी पानी की कमी है।
ग्रामीण इलाकों में नए ट्यूबवेल बनाने, पुराने जल स्रोतों को गहरा करने और पाइपलाइन तथा पंपिंग व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
समर कंटीजेंसी प्लान के तहत बजट और कार्यों का खाका तैयार है, लेकिन इनकी समय पर पूर्णता भी अहम होगी। विभागीय रिपोर्ट में कुछ कार्यों के अंतिम बिल लंबित होने, कुछ योजनाओं की कमीशनिंग बाकी रहने और आवश्यक बिजली कनेक्शन नहीं मिलने जैसी समस्याओं का उल्लेख है।
जिला सर्किल में नौ थ्री-फेज बिजली कनेक्शन लंबित बताए गए हैं। इसके अलावा कुछ परियोजनाओं में जमीन आवंटन और वन विभाग की अनुमति से जुड़े मामले भी लंबित हैं।
ऐसे में जरूरी है कि प्रस्तावित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। खासतौर पर कम प्रेशर वाले इलाकों, दूषित पाइपलाइनों और टेल-एंड क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि पानी का वितरण अधिक प्रभावी हो सके।
जयपुर में पानी की मांग और आपूर्ति के बीच बना अंतर आगामी गर्मियों के लिए बड़ी चुनौती है। 55.45 करोड़ रुपए का समर कंटीजेंसी प्लान राहत की उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन इसकी सफलता प्रस्तावित कार्यों के समय पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
क्या गर्मी शुरू होने से पहले नए ट्यूबवेल और पाइपलाइन के काम पूरे होंगे? क्या अंतिम छोर पर बसे इलाकों तक पर्याप्त प्रेशर से पानी पहुंचेगा? और क्या जरूरतमंद क्षेत्रों में टैंकरों की व्यवस्था समय पर हो पाएगी? इन सवालों के जवाब तय करेंगे कि जयपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को आगामी गर्मियों में कितनी राहत मिलती है।
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