मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2027 तक प्रदेश के किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में राज्य सरकार की ओर से विद्युत आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बिरलोका जीएसएस के शुरू होने से बिरलोका, नारवा, हिसाबा, पांचला सिद्धा, खींवसर और पांचौड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिलेगा। इस परियोजना से विशेष रूप से खींवसर तहसील में दिन के समय कृषि कार्यों के लिए बिजली आपूर्ति की व्यवस्था मजबूत होगी।
अब तक अजमेर डिस्कॉम के 14 जिलों में से 13 जिलों में किसानों को दिन के समय दो ब्लॉक में बिजली देने की व्यवस्था लागू थी। नए जीएसएस के शुरू होने से शेष क्षेत्र में भी इस व्यवस्था का विस्तार संभव हुआ है।
बिरलोका में लगभग 170 करोड़ रुपये की लागत से ग्रिड सब-स्टेशन का निर्माण किया गया है। इसमें 160 एमवीए क्षमता का 220/132 केवी पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किया गया है। परियोजना में अत्याधुनिक स्काडा प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे पश्चिमी राजस्थान में उत्पादित सौर ऊर्जा का नागौर जिले में बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
इससे बिजली की छीजत कम करने के साथ वोल्टेज स्तर, आपूर्ति की गुणवत्ता और विद्युत व्यवस्था की विश्वसनीयता में सुधार होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक प्रदेश के किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन में बिजली दी जा रही है। बिरलोका जीएसएस की शुरुआत को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए रात में खेतों में जाने की निर्भरता कम करने और कृषि कार्यों को सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।
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