राज्य के प्रमुख हाट अब पीपीपी मॉडल पर होंगे संचालित, दस्तकारों और लघु उद्यमियों को मिलेगा आधुनिक बाजार

जयपुर, 16 अगस्त। राज्य के पारंपरिक दस्तकारों, बुनकरों, महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और लघु उद्यमियों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने तथा उन्हें सीधे बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्रमुख हाटों को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर संचालित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री शिखर अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य हाटों को केवल बिक्री केंद्र तक सीमित रखने के बजाय उन्हें दस्तकारों, बुनकरों और लघु उद्यमियों के लिए आधुनिक बाजार एवं विपणन मंच के रूप में विकसित करना है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा 27 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर की गई घोषणा की पालना में राज्य के चार प्रमुख हाटों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी क्रम में उद्योग प्रोत्साहन संस्थान के माध्यम से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया गया है। हाटों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की कार्यवाही शीघ्र पूरी की जाएगी।

चार प्रमुख हाटों का होगा पीपीपी मॉडल पर संचालन

श्री अग्रवाल के अनुसार अलवर, पुष्कर, जैसलमेर और नाथद्वारा स्थित हाटों का संचालन एवं प्रबंधन पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा। इन हाटों में राज्य के हुनरमंद दस्तकारों, बुनकरों, लघु उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा ओडीओपी और जीआई उत्पादों को प्रदर्शन एवं विपणन के लिए आधुनिक और सुविधायुक्त मंच उपलब्ध कराया जाएगा।

इससे उपभोक्ताओं को सीधे गुणवत्तापूर्ण स्थानीय उत्पाद मिल सकेंगे और दस्तकारों तथा उद्यमियों को अपने उत्पादों का बेहतर एवं उचित मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।

हाटों में होंगे प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम

पीपीपी मॉडल के तहत हाटों में केवल मेलों और औद्योगिक प्रदर्शनियों का आयोजन ही नहीं किया जाएगा, बल्कि दस्तकारों के कौशल विकास के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।

इसके अलावा हाटों में ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे दूसरे क्षेत्रों से आने वाले दस्तकारों और प्रतिभागियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

पर्यटन और व्यापार के केंद्र के रूप में विकसित होंगे हाट

सरकार का मानना है कि पीपीपी मॉडल पर संचालन से हाटों के बुनियादी ढांचे और प्रबंधन में सुधार होगा। आधुनिक विपणन सुविधाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

इन हाटों को स्थानीय पर्यटन और व्यापार के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे राजस्थान के पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच बढ़ने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

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