पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और कौशल विकास के कार्यों को मिले प्राथमिकता; गुणवत्तापूर्ण कार्यों और प्रभावी मॉनिटरिंग पर जोर

जयपुर। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड का प्रभावी उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डीएमएफटी फंड से पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण कार्य कराए जाएं।

मुख्य सचिव शुक्रवार को सचिवालय में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन की राज्य स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र के गांवों में सड़क और अन्य आधारभूत संरचनात्मक कार्यों के लिए राशि स्वीकृत करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि उपलब्ध राशि से कार्य पूरी तरह संपन्न हो सके।

उन्होंने वित्त विभाग को निर्देश दिए कि कार्यों की प्राथमिकता और गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए राशि स्वीकृत की जाए। साथ ही, कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि डीएमएफटी फंड केवल राशि खर्च करने का माध्यम नहीं, बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बनना चाहिए।

डीएमएफटी के बेहतर उपयोग के लिए बनेगी पंचवर्षीय योजना

मुख्य सचिव ने कहा कि डीएमएफटी फंड के गुणवत्तापूर्ण और बेहतर उपयोग के लिए कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही जिला कलेक्टर्स के साथ नियमित समीक्षा भी की जाएगी। उन्होंने खनन क्षेत्रों में डीएमएफटी फंड के बेहतर उपयोग के लिए पंचवर्षीय योजना तैयार करने की आवश्यकता जताई, ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को दीर्घकालिक रूप से बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

मेजर मिनरल से 30 और माइनर मिनरल से 10 प्रतिशत रॉयल्टी

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस श्रीमती अपर्णा अरोरा ने बैठक में डीएमएफटी फंड की जानकारी देते हुए बताया कि मेजर मिनरल लीज से रॉयल्टी की 30 प्रतिशत तथा माइनर मिनरल लीज से रॉयल्टी की 10 प्रतिशत राशि डीएमएफटी में एकत्रित होती है।

उन्होंने बताया कि इस फंड का उपयोग सामान्यतः खनन क्षेत्र से 15 किलोमीटर के दायरे में प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है। आवश्यकता होने पर 15 से 25 किलोमीटर क्षेत्र तक भी कार्य कराए जा सकते हैं। डीएमएफटी के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों के साथ-साथ सड़क और आधारभूत संरचना के कार्य भी कराए जाते हैं।

डीएमएफटी में हर साल औसतन 1600 करोड़ रुपये

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस ने बताया कि डीएमएफटी फंड में हर साल औसतन करीब 1600 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होती है। संबंधित जिलों में अब तक 11,435 करोड़ 81 लाख रुपये की लागत के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 6,718 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टरों को डीएमएफटी से कार्य स्वीकृत करते समय प्राथमिकताएं तय करनी होंगी, ताकि खनन से प्रभावित गांवों में विकास कार्यों के साथ लोगों को आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

अधिकारियों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण श्री आनंद कुमार, एसीएस सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता श्री दिनेश कुमार, एसीएस शिक्षा श्री राजेश यादव तथा एसीएस सार्वजनिक निर्माण विभाग श्री प्रवीण गुप्ता ने डीएमएफटी में उपलब्ध राशि के उपयोग पर संतोष व्यक्त करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

भारत सरकार के निदेशक श्री नितिन पाण्डे ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से डीएमएफटी पोर्टल पर आवश्यक जानकारी साझा की जा रही है।

बैठक में विशिष्ट सचिव माइंस श्रीमती नम्रता वृष्णि ने डीएमएफटी के कार्यों और प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर योजना सचिव श्री रविकुमार सुरपुर, पीएचईडी सचिव श्री राजन विशाल, वित्त सचिव व्यय श्रीमती टीना सोनी, निदेशक माइंस श्री एमपी मीणा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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