मीडिया कर्मियों का कहना है कि किसी भी मुद्दे पर विचारों में असहमति या विरोध हो सकता है, लेकिन पत्रकारों के साथ मारपीट और महिला पत्रकारों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
घटना के बाद पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है और किसी भी आंदोलन या सार्वजनिक कार्यक्रम को कवर करने पहुंचे पत्रकारों के साथ सुरक्षित एवं सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
जयपुर में इससे पहले भी पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट के मामले सामने आने के दावे किए जाते रहे हैं। प्रदर्शन और आंदोलनों की कवरेज के दौरान पत्रकारों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते रहे हैं।
पत्रकारों का कहना है कि किसी खबर, रिपोर्ट या मीडिया संस्थान की कवरेज से किसी व्यक्ति या संगठन को असहमति हो सकती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसका विरोध भी किया जा सकता है, लेकिन विरोध का तरीका हिंसा या अभद्र भाषा नहीं होना चाहिए।
खास तौर पर महिला पत्रकारों के साथ कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर पत्रकार समुदाय ने चिंता जताई है और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग उठाई है।
इस घटना के बाद पत्रकारों की एकजुटता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पत्रकार समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि मीडिया कर्मी अपने साथ होने वाले दुर्व्यवहार और हिंसा के खिलाफ एकजुट होकर आवाज नहीं उठाएंगे, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का खतरा बना रहेगा।
फिलहाल घटना को लेकर पत्रकारों के बीच रोष है। मामले में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। हालांकि, घटना को लेकर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
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